प्रार्थना......

हे नाथ! आपसे मेरी प्रार्थना है कि आप मुझे प्यारे लगें। केवल यही मेरी माँग है और कोई माँग नहीं।

He Naath ! It is my sincere prayer to you, that You appear sweet and loving to me. That is my only requirement, there is no other requirement.

हे नाथ! अगर मैं स्वर्ग चाहूँ तो मुझे नरक में डाल दें, सुख चाहूँ तो अनन्त दुःखों में डाल दें, पर आप मुझे प्यारे लगें।

He Naath ! If I desire heavens, then you place me in hell; if I desire happiness, then shower me with endless sorrows, but may You at all times appear sweet and loving to me.

हे नाथ! आपके बिना मैं रह न सकूँ, ऐसी व्याकुलता आप दे दें।

He Naath ! May You create such intense longing, such distress within me that. I am unable to live without You.

हे नाथ! आप मेरे हृदय में ऐसी आग लगा दें कि आपकी प्रीति के बिना मैं जी न सकूँ।

He Naath ! May You create such a fire in my heart, that I am unable to live without Your love.

हे नाथ! आपके बिना मेरा कौन है? मैं किससे कहूँ और कौन सुने?

He Naath ! Besides You who else is mine? Who should I tell, who will listen?

हे मेरे शरण्य! मैं कहाँ जाऊँ? क्या करूँ? कोई मेरा नहीं।

O' My Protector! Where will I go? What will I do? No one is mine.

मैं भूला हुआ कइयों को अपना मानता रहा । उनसे धोखा खाया, फिर भी खा सकता हूँ, आप बचायें!

Being lost, I believed many to be mine.
But I was betrayed by them. Once again I am likely to be betrayed. You please save me !

" भव्य जगन्नाथ यात्रा "

"हरे कृष्णा"

कल रविवार 17 फरवरी 2013 हमारे " श्रीमन्नारदीय भगवत निकुंज " द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी भव्य जगन्नाथ यात्रा का आयोजन हो रहा है । यात्रा कल सुबह 10 बजे संजीव मैमोरियल पब्लिक स्कूल से प्रारम्भ होकर जनकपुरी मेंन मार्केट, त्रिवेणी धाम मंदिर, गौड़ प्ळाजा, गणेशपुरी, शिव चौक, शालीमार गार्डन पुलिस चौकी, नया बिजली घर, बुध बाजार रोड, एस. एम. वर्ल्ड, चन्द्रशेखर पार्क ( बी0 ब्ळाक ) पर विश्राम लेगी ।

आइये भगवान जगन्नाथ जी की यात्रा और प्रसाद जो बड़े सौभाग्य से प्राप्त होते है उसे यात्रा में सम्मिलित होकर भगवान की असीम कृपा के रूप में प्राप्त करें ।

      

       निवदेक
  समस्त नारदीय परिवार
शालीमार गार्डन, साहिबाबाद

     (9818929827)

भव्य जगन्नाथ यात्रा का आयोजन

"हरे कृष्णा"

प्रभु जी आप सबको ये जानकर अत्यंत हर्ष होगा की  हमारे " श्रीमन्नारदीय भगवत निकुंज "  द्वारा प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी भव्य जगन्नाथ यात्रा का आयोजन हो रहा है । भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की असीम कृपा से हम सबको भगवान जगन्नाथ जी के रथ का दर्शन और स्पर्श का सौभाग्य  हमारे क्षेत्र में प्राप्त होने जा रहा है । कहते है भगवान श्री कृष्ण का एक नाम पतित पावन है एवं जगन्नाथ भगवान श्री कृष्ण स्वयं अपनी प्रजा के उद्धार के लिए उन के बीच रथ पर आरूढ़ होकर भ्रमण करते है । भगवान जगन्नाथ जी सदैव अपनी दोनों भुजाएें फैलाकर हमारी प्रतीक्षा करते है, यात्रा रविवार 17 फरवरी 2013 सुबह 10 बजे संजीव मैमोरियल पब्लिक  स्कूल से प्रारम्भ होकर जनकपुरी मेंन मार्केट, त्रिवेणी धाम मंदिर, गौड़ प्ळाजा, गणेशपुरी, शिव चौक, शालीमार गार्डन पुलिस चौकी, नया बिजली घर, बुध बाजार रोड, एस. एम. वर्ल्ड, चन्द्रशेखर पार्क ( बी0  ब्ळाक ) पर विश्राम लेगी ।

आइये भगवान जगन्नाथ जी की यात्रा और प्रसाद जो बड़े सौभाग्य से प्राप्त होते है उसे यात्रा में सम्मिलित होकर भगवान की असीम कृपा के रूप में प्राप्त करें ।


 निवदेक
समस्त नारदीय परिवार


"हरे कृष्णा"

प्रेरक कथा- झगडे का मूल



यह कहानी संत के ज्ञान को दर्शाने वाली कथा है क्युकी हमेशा ही ये माना जाता है की संत, गुरु, साधू और मुनि महाराज के पास उन सभी सांसारिक... समस्याओ का तुरंत हल मिल जाता है जिसके बारे में आज लोग और गृहस्ती हमेशा से ही परेशान रहतेहै |

समाज में साधू,संत,गुरु और मुनि ही हर समस्या की एक मात्र चाबी माने जाते रहे है और यह सही भी है की इनके पास जाने मात्र से ही हमारे मन को शांति प्राप्त हो जाती है और फिर जब इनके दो सांत्वना भरे बोल या ज्ञान बढ़ने वाले शब्द जब हमारे कान में जाते है तो जेसे अन्दर तक आत्मा को ठंडक पहुंचती है

इसलिए आज एक ऐसी ही कहानी लेकर आया हु जिससे आप गुरु की महिमा को समझ ही जायेंगे की क्यों और केसे ये सभी विद्धवान जन तुरंत ही हरेक के मन की समस्या का समाधान कर देते है |


एक बार गोमल सेठ अपनी दुकान पर बेठे थे दोपहर का समय था इसलिए कोई ग्राहक भी नहीं था तो वो थोडा सुस्ताने लगे इतने में ही एक संत भिक्षक भिक्षा लेने के लिए दुकान पर आ पहुचे

और सेठ जी को आवाज लगाई कुछ देने के लिए...

सेठजी ने देखाकी इस समय कोण आया है ?

जब उठकर देखा तो एक संत याचना कर रहा था

सेठ बड़ा ही दयालु था वह तुरंत उठा और दान देने के लिए कटोरी चावल बोरी में से निकला और संत के पास आकर उनको चावल दे दिया

संत ने सेठ जी को बहुत बहुत आशीर्वाद और दुवाए दी

तब सेठजी ने संत से हाथ जोड़कर बड़े ही विनम्र भाव से कहा की

है गुरुजन आपको मेरे प्रणाम में आपसे अपने मन में उठी शंका का समाधान पूछना चाहता हु |

संत याचक ने कहा की जरुर पूछो

तब सेठ जी ने कहा की लोग आपस में लड़ते क्यों है ?

संत ने सेठजी के इतना पूछते ही शांत स्वभव और वाणी में कहा की

सेठ मै तुम्हारे पास भिक्षा लेने के लिए आया हु तुम्हारे इस प्रकार के मुरखता पूर्वक सवालो के जवाब देने नहीं आया हु |

इतना संत के मुख से सुनते ही सेठ जी को क्रोध आ गया और मन में सोचने लगे की यह केसा घमंडी और असभ्य संत है ?
ये तो बड़ा ही कृतघ्न है एक तरफ मैंने इनको दान दिया और येमेरे को ही इस प्रकार की बात बोल रहे है इनकी इतनी हिम्मत

और ये सोच कर सेठजी को बहुत ही गुसा आ गया और वो काफी देर तक उस संत को खरी खोटी सुनते रहे
और जब अपने मनकी पूरी भड़ास निकल चुके
तब कुछ शांत हुए तब संत ने बड़े ही शांत और स्थिर भाव से कहा की –

जैसे ही मैंने कुछ बोला आपको गुस्सा आ गया और आप गुस्से से भर गए और लगे जोर जोर से बोलने और चिलाने

वास्तव में केवल गुस्सा ही सभी झगडे का मूल होता है यदि सभी लोग अपने गुस्से पर काबू रख सके तो या सिख जाये तो दुनिया में झगडे ही कभी न होंगे !!!