जीवन में उतारने योग्य भाईजी की अतुल संपत्ति—
१.सबमें भगवान् को देखना २.भगवत्कृपा पर अटूट विश्वास ३.भगवन्नाम का अनन्य आश्रय
करो प्रभु ! ऐसी दृष्टि-प्रदान। देख सकूँ सर्वत्र तुम्हारी सतत मधुर मुस्कान ॥
हो चाहे परिवर्तन कैसा भी-अति क्षुद्र, महान। सुन्दर-भीषण, लाभ-हानि, सुख-दुःख, मान-अपमान॥
प्रिय-अप्रिय,स्वस्थता-रुग्णता, जीवन-मरण-विधान। सभी प्राकृतिक भोगोंमें हो भरे तुम्ही भगवान् ॥
हो न उदय उद्वेग-हर्ष कुछ,कभी दैन्य-अभिमान। पाता रहूँ तुम्हारा नित संस्पर्श बिना-उपमान॥
- पूज्य भाई जी (पदरत्नाकर)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ||