+ आश्चर्य +

हरे कृष्ण

जब यक्ष ने धर्मराज से पूछा की सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? तो धर्मराज ने कहा की लोग नित्य मृत्यु को प्राप्त होते है फिर भी जो जीवित है वो सोचेते है की हम नहीं मरेंगे इससे बड़ा कोई आश्चर्य नहीं है | ऐसा ही एक और आश्चर्य हमारे संतो ने भी देखा है और वो ये है की जैसे कोई समुंदरी जहाज किनारे पहुँच कर डूब जाये और आपको ये पता लगे की उस जहाज के यात्रियों को इस बात का पता भी था और वो बच भी सकते थे | तो आपको बहुत हैरानी होगी | हमारे संतो को भी ऐसी ही हैरानी होती है और वे कहते है कि ये मनुष्य शरीर ही वो जहाज है जो इस 84 लाख योनियों को पर कर के भवसागर के किनारे पहुँच चुका है, प्रभु प्राप्ति बिना मर जाना ही इसे डुबो देना है |




हमे इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि हमारा जहाज डूबे इस से पहले हमे भगवत प्राप्ति कर लेनी है |

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे |
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ||

* * * * धोखा * * * *

हरे कृष्ण,

धोखा कितना बुरा लगता है पर हम नहीं जानते की हम हमेशा से धोखे मैं ही रहते हैं| जैसे किसी कि चिता को अग्नि देने के बाद हम सोचते है कि इसका तो समय हो गया था मेरा समय अभी नहीं आया या मैं थोड़े ही मरूँगा | कुछ लोग तो इतने व्यस्त होते हैं कि उन्हें इस तरफ सोचने का वक्त नहीं मिलता | कोई उन्हें कहता भी है कि भाई भजन करो इस मनुष्य शरीर का कोई भरोसा नहीं, तो वो सोचते है कि कितना अपशकुनी है मरने कि बाते करता है, और वो उस व्यक्ति को टालने के लिए उससे पीछा छुड़ा लेते है|

पर उनको ये नहीं पता कि वो व्यक्ति ठीक कह रहा है| हम जिस शरीर से इतना प्यार करते हैं एक दिन वो ही प्यारा शरीर हमे धोखा दे देगा | हम जिस से प्यार करते है वो हमे एक दिन धोखा देगा और पता नहीं किस नयी दुनिया में चला जायेगा | हम जिस संसार को अपना मान लेते हैं, एक दिन हमे उसको छोड़ना पड़ेगा |

असल में हमे धोखा देने और धोखा खाने कि आदत पड़ गयी है | तभी तो हम जिस शरीर से प्यार करते है उससे धोखा खाते है और जो परमात्मा हमसे प्यार करता है उसको धोखा देते है | हम सभी जानते है कि उससे प्यार करना चाहिए जो हमे प्यार करता हो फिर भी हम धोखा करते है |

आज से ये समझ ले कि ये संसार हमे धोखा देगा तो इस धोखे से बचे और अपने से प्यार करने वाले परमात्मा के साथ इमानदार बने और उन्हें प्यार करे | इसलिए न तो धोखा दे और न तो धोखा खाए
और अपने प्रिय साथियों को भी इस धोखे से बचाए|


"हरे कृष्णा"

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे

भजन न करने की बहानेबाजी

हरे कृष्ण
कुछ लोग कहते हैं कि हम भजन इसलिए नहीं करते हैं क्योंकि भगवान ने भजन करना हमारे भाग्य में ही नहीं लिखा|
उनसे पूछा जाये - तो फिर धन कमाने की कोशिश क्यों करते हो? क्या उसका मिलना आपके भाग्य में लिखा है?
आपने अपना भाग्य किस पुस्तक में देखा है|

ये सब बातें केवल भजन न करने की बहानेबाजी है|

जिस प्रकार धन कमाने के लिए हम मेहनत करते है तो उसका प्रतिफल हमे प्राप्त होता है, उसी प्रकार यदि हम भगवान का भजन करते हैं तो उसके फल स्वरुप हमे भगवान की प्राप्ति हो जाती है|

तो इस लिए हमे प्राप्त समय का सदुपयोग करना चाहिए, अर्थात भगवान का भजन करना चाहिए|

हरे कृष्ण

Narad krishn priya das

Lord Jagannath Rath Yatra Invitation..

Respected Maharajas/Prabhus,
     "Hare Krishna"

Please accept our humble obeisances.
All glories to Devrishi Narad Ji Maharaj.
All glories to Lord Jagannath Rath Yatra.
All glories to Shri Shri Radha Madan Mohan and Shri Shri Jagannath, Baldev & Subhadra Maharani.


Maharajas/Prabhus, on the behalf of  S.N.B.M, I would like to
humbly beg at your lotus feet to kindly accept our invitation to attend
Lord Jagannath Rath Yatra on Sunday, 26th Dec 2010.

This is our annual festival when Lord Jagannath yatra goes to roads and streets to
bestow His causeless mercy upon the general people. And this year we are
celebrating Rath Yatra festival with very high spirits and great feeling,
this is going to start from Tarun Krishan Prabhu Ji Home (Janakpuri Market), near Shalimar Garden, Sahibabad Ghaziabad (U.P).

Maharajas/Prabhus, your presence will uplift the moral and enthusiasm of
all the souls assembled there to celebrate Lord Jagannath Rath Yatra. So
kindly allocate this day for S.N.B.M and that will be very
pleasing to Shri Narad Ji Maharaj who brought this yatra festival from Jagannath
Puri to other towns in the world.

Prabhu ji,

I would like to humbly beg at your lotus feet to kindly accept our invitation to attend Lord Jagannath Rath Yatra on Sunday, 26th Dec 2010.


Thank you.

Your humble servant 
(Radha Madhav das)
       S.N.B.M
    09818929827